भोर को भोर होने दो
भोर को भोर होने दो,
भोर को भोर रहने दो,
भोर को भोर कहने दो,
भोर भोर है,
भोर केवल भोर है!
वह कोई प्रतिक्रिया नहीं,
कोई आक्रोश नहीं,
स्वयं सृष्टि की एक सकर्मक क्रिया है।
भोर किसी अँधेरे का प्रत्यय नहीं,
किसी अपर व्यक्तित्व का उपसर्ग नहीं,
प्रकृति का एक अस्तित्व-खंड है,
एक सात्विक, सजग, सोद्देश्य अस्तित्व!
भोर है जीवन का उज्ज्वल ज्ञान-खंड,
एक सर्वव्यापी ज्ञान, एक विशद ध्येय,
जीवन का सुंदर सर्ग, एक महान् उत्सर्ग!
भोर को भोर होने दो,
भोर को भोर रहने दो,
भोर को भोर कहने दो,
भोर भोर है,
भोर केवल भोर है!
⁃ सतीश
May 18, 2022.
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें