सूर्य
भोर की पहली किरण से
संध्या की अंतिम किरण तक
सूर्य जीवन-रण में संलग्न है,
पूरी नीरवता के साथ!
आसमान के नीले-नीले सत्व को जगातीं,
उसके अंतस्तल की ज्योति को सुलगातीं,
शीत हवाओं को उष्णता का मर्म देतीं,
अन्यमनस्क जगत्-गाँठों को खोलतीं,
सुंदर भावों को सतत् थपथपातीं, कुछ उकसातीं,
विस्मयों, उत्सुकताओं को नये विन्यासों से भरतीं,
प्रकृति को जीवन के प्राण सौंपतीं,
अपूर्णताओं के व्यक्तित्वों में
पूर्णता का आभास घोलतीं,
कथित-अकथित,पठित-अपठित, दृश्य-अदृश्य
मूल्यों के प्रसंगों के संग खेलतीं,
अथ से अंत तक की अनंत यात्रा में डूबी
स्वच्छ, स्पष्ट, सीधी, सहज सूर्य-किरणें!
सूरज जीवन-रण में समाहित है,
सम्पन्न अनाद, सुसंस्कृत, सानंदित नाद के साथ!
-सतीश
Dec 11, 2022.
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