सूर्य


भोर की पहली किरण से

संध्या की अंतिम किरण तक 

सूर्य जीवन-रण में संलग्न है,

पूरी नीरवता के साथ


आसमान के नीले-नीले सत्व को जगातीं,

उसके अंतस्तल की ज्योति को सुलगातीं

शीत हवाओं को उष्णता का मर्म देतीं,

अन्यमनस्क जगत्-गाँठों को खोलतीं,

सुंदर भावों को सतत् थपथपातींकुछ उकसातीं,

विस्मयोंउत्सुकताओं को नये विन्यासों से भरतीं,

प्रकृति को जीवन के प्राण सौंपतीं,

अपूर्णताओं के व्यक्तित्वों में 

पूर्णता का आभास घोलतीं,

कथित-अकथित,पठित-अपठितदृश्य-अदृश्य 

मूल्यों के प्रसंगों के संग खेलतीं,


अथ से अंत तक की अनंत यात्रा में डूबी

स्वच्छस्पष्टसीधीसहज सूर्य-किरणें


सूरज जीवन-रण में समाहित है,

सम्पन्न अनादसुसंस्कृतसानंदित नाद के साथ


-सतीश 

Dec 11, 2022. 


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