अनगढ़

जिन्हें अनगढ़ पहाड़ों पर चढ़ने-उतरने की लत है,

उन्हें सीढ़ियों-पायदानों का मोह छोड़ देना चाहिए;

जिन्हें  आफत-आँधियों पर उड़ने-उतराने की आदत हो,

उन्हें हल्के बयारों की टोह छोड़ देनी चाहिए! 


जिन्हें तंग सुरंगों में और तुंग शिखरों पर रहने की आदत है,

उन्हें समतलों, सीधी राहों, सुराहों को छोड़ देना चाहिए;

जिन्हें खुरदरे वृक्षों की छाल पहनने की आदत हो,

उन्हें फिसलती लतिकाओं से लिपटना छोड़ देना चाहिए!


जिन्हें ऊँचे-तने वटों की शाखाओं पर विराजने की आदत हो,

उन्हें लघु तरूओं का आश्रय छोड़ देना चाहिए;

जिन्हें बड़े मिज़ाजों में बसी फ़क़ीरी की आदत है,

उन्हें कलुष-क्लेश की कंदराओं में भटकना छोड़ देना चाहिए! 


जिन्हें हिम-धवल श्रृंगों के छोर पर रहने की आदत है,

उन्हें बौने मुकुटों का प्रेम छोड़ देना चाहिए;

जिन्हें मदमाते मेघों पर मचलने-विहरने की आदत है,

उन्हें मान्य-सामान्य सतहों पर सरकना छोड़ देना चाहिए!


जिन्हें अनजानी वादियों में लहलहाने की आदत है,

उन्हें सजे-सजाये गमलों में सिमटना छोड़ देना चाहिए;

जिन्हें अनमने वन में भूलने-भटकने की आदत है,

उन्हें बने-बनाये सजीले पथों पर टहलना छोड़ देना चाहिये! 


जिन्हें मदहोश मँझधारों में पैठने-तैरने की आदत है,

उन्हें अविचलित तटों पर बाट जोहना छोड़ देना चाहिए;

जिन्हें जीवन-धूप में जलने-उबलने की आदत हो,

उन्हें लम्बी छाँह की शीतल बाँह छोड़ देनी चाहिए ! 


जिन्हें व्यग्र जीवन-समुद्र के उदात्त वक्ष को धरने-धारने की आदत है,

उन्हें अविकल जल में थिरने-थमने का मन छोड़ देना चाहिये,

जिन्हें व्यापक दिलों की धड़कनों में उठने-उमगने की आदत है,

उन्हें स्याह स्मृतियों की लचकनों पर डोलना-सिहरना छोड़ देना चाहिए। 


सतीश 

13 Dec, 2016. 










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