नया वसंत
इस नये वसंत का अभिनंदन है,
यह “अभिनंदन” का नया वसंत है!
सरहद के ख़ंजरों से लेकर आम के मंजरों तक
यह नई भंगिमा, नई महक, नये स्वाद का मौसम है।
कुंठा, ग्लानि, हीनता-ग्रंथि और अकर्म के
शरद्-शीत के पार यह प्रकृति का रूप सुंदरतम है!
यह सरस्वती के शक्ति-रूप की नई कूक है,
यह गीता के कर्म-श्लोकों की नयी हूक है,
भारतीय अस्मिता के स्वरों-सुरों को
तानता हुआ पंचम तान है,
यह भारत और भारतीयता का नया वितान है!
यह नये तेवर, नये अंदाज़, नये मिज़ाज की
मिली-जुली बोली है,
इसमें नये रंगों, नये पुचकारों, नये खेलों की ख़ुश होली है!
इस वसंत का सप्रणाम अभिनंदन है,
यह “अभिनंदन” का नया वसंत है!
इसमें परशुराम के परशु का नया आह्वान है,
महाराणा प्रताप, चित्तौड़, चेतक की धड़कनों की ध्वनि है,
इसमें मेवाड़ के जंगलों में दौड़ती
भारतीय इच्छा-शक्ति का योग-धर्म है।
इसमें हल्दीघाटी की स्मृति की ख़ुशबू है,
छत्रपति शिवाजी के इरादों के छत्रों की छाया है।
इसमें महारानी लक्ष्मीबाई के अडोल शौर्य का सौंदर्य है,
वैशाली के लिच्छवि के गणतंत्र की गर्वीली गाथा है !
मेवाड़ के भूखे पर्वतों के आत्म-सम्मान में
बनने-तपने वाली घास की रोटी से लेकर
मुम्बई के चेम्बूर के अणुशक्ति-प्रयोगशाला में
वैज्ञानिकों की तपस्या में हुँकारने वाली
यह एकनिष्ठ, एकमन, एकतार, ऐकिक ज़ुबानी है।
यह रामेश्वरम् के नये राम अब्दुल कलाम के
संकल्प-सेतु पर चढ़े हुए पोखरम्-शर की बयानी है,
यह विश्व-राजनीति की छाती में टंकारने वाली
भारत की “अटल (बिहारी)”- वाणी है!
सचमुच, इस बार ऋतुपति की कहानी
कर्म-बोध से भरी-भरी है, बड़ी मस्तानी, बड़ी सयानी है!
इस वसंत का सप्रणाम, सविनय अभिनंदन है,
यह “अभिनंदन” का नया वसंत है!
⁃ सतीश
22 March, 2019
(पाकिस्तान पर “सर्जिकल स्ट्राइक” के बाद “अभिनंदन” के भारत लौटने पर एक लघु अभिव्यक्ति)
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