दूर जाती आँखें


सिमटा हुआ मन,

ठहरी हुई यादें,

ऊभ-चुभ सोच


भाव-भँवर की घूर्णियों में घूमती आँखें 

जा रही हैं चुपचाप  दूर-सुदूर -

राग-रंग-रव ढूँढतीकुछ अंतरंग खोजती,

अनुभूतियों का पता-ठिकाना टोहती -


कुछ पहचानी-सीकुछ अनजानी-सी


सतीश

April 16, 2023

& May 5, 2023

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आतंकवाद की शैली

बहुत बार

तुम, भोर के विन्यास सी!