तेरी काया

तेरी काया 

 - - 

जीवन एक सजल छाया है,

कुछ और नहींबसतेरी काया है, -

सहित-रहितपूर्ण-अर्द्धसम्पूर्णसमाहित ! 


हर ऋतु है तेरी छटा मनोहर;

एक भावमयी भंगिमाअभिव्यक्ति शील-शरीर की,

विविध जीवन-रस में मज्जितरूपायित


हँसता वसंत हो या तपता ग्रीष्म,

या मन-विभोर भीगी-भीगी वर्षा,

हो कहीं पुलकित शरद या मृदुल हेमंत

या अनजाने अंतरंग भावों से कंपित शीत,-

सब हैं तेरे मन की मर्ममयी करवटें;

सुंदर छंदों में बाँध दूर दूर तक ले जाती हैं 

जीवन की वे सहजभोली आहटें


  • सतीश 

Oct 14, 2023

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आतंकवाद की शैली

बहुत बार

तुम, भोर के विन्यास सी!