वक्ष

वक्ष


मन-तन की पुलक की ऊभ-चुभ, 

उथल-पुथल को सगर्व सँभाले,

नेह से भरे वक्ष उठे, जगे हैं, -

प्रकृति की संकलित आभा से निखरे,

सुंदर, सुरभित, अपरिमित, निष्कलुष, निराले! 


सम्पूर्ण वलय में लय है जीवन-सौंदर्य के मोहक दर्शन! 



-सतीश 

अगस्त 3/10, 2024





टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

आतंकवाद की शैली

बहुत बार

तुम, भोर के विन्यास सी!