चाँद का टुकड़ा कैसा होगा? ( भाग - २)

चाँद का टुकड़ा कैसा होगा? 

( भाग - २)


चाँद का टुकड़ा कैसा होगा? 

मन के जैसा-जैसा होगा! 


कहीं-कहीं वह संत-स्वभाव,

कहीं कहीं वह मद में होगा!

कहीं-कहीं मोह से लिपटा,

कहीं-कहीं वह त्यागी होगा! 


   चाँद का टुकड़ा कैसा होगा? 

   मन के जैसा-जैसा होगा! 


कहीं-कहीं रोता होगा,

कहीं-कहीं वह गाता होगा! 

कहीं-कहीं नींद में भूला,

कहीं-कहीं वह जगा होगा!


   चाँद का टुकड़ा कैसा होगा? 

   मन के जैसा-जैसा होगा! 



कहीं-कहीं भीगा-गीला,

कहीं-कहीं वह सूखा होगा! 

कहीं-कहीं वह सीधा-साधा,

कहीं-कहीं मादक होगा! 


   चाँद का टुकड़ा कैसा होगा? 

   मन के जैसा-जैसा होगा! 


कहीं-कहीं हेमंत और शीत,

कहीं-कहीं वसंत और ग्रीष्म,

कहीं-कहीं वह सावन होगा, 

सम्पूर्ण, सिक्त मनभावन होगा! 


कहीं-कहीं धर्म-अधर्म,

कहीं-कहीं कला-अकला,

कहीं-कहीं कविता-कहानी, 

कहीं-कहीं सकल जीवन होगा! 


        चाँद का टुकड़ा कैसा होगा? 

        मन के जैसा-जैसा होगा! 


सतीश 

अगस्त 9, 2024


     


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