हिंदी
हिंदी
हिन्दी है संस्कृत की बेटी,
संस्कृति की वाहिका,
समाज के मन की भाषा
और देश की आत्मा!
वह अपने आप को थोपती नहीं,
किसी दूसरी भाषा को छोटा नहीं समझती,
वो विविध बोलियों के संग-संग प्रसन्न रहती है,
उसके ह्रदय का संसार विविधताओं से भरा है!
पूरब-पश्चिम-उत्तर-दक्षिण को
एकता के स्वरों, सुरों से बाँधती,
रीति-रस्म, त्योहारों, पीड़ाओं, आचार-विचार,
सूझ-समझ, चिंतन, मान्यताओं को
सहजता और गूढ़ता से अभिव्यक्त करती,
लोरियों, कहावतों, मुहावरों, लोक-कथाओं से भरी
हिंदी देश का जीवन है, जीवन की शैली है!
वह देश का प्राण है, प्राण की साँस भी !
-सतीश
3 जुलाई, 2024.
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