यादें
यादें
यादों की अपनी उँगलियाँ होती हैं,
वे मन के अँधेरे फलक पर भी
अपनी भंगिमाओं से कुछ गढ़ जाती हैं,
कुछ कह जाती हैं!
स्मृतियों के अपने पर होते हैं,
वे सरकते हुए भी, सहमते हुए भी
दूरी को, दूरी के सन्नाटे को
कुछ स्वर, कुछ ध्वनि दे जाते हैं!
-सतीश
सितम्बर 20, 2024 (फ़ोटो)
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