कौन जगा है?
कौन जगा है?
दूर क्षितिज पर
कौन उठा है,
प्राची के सुंदर प्रांगण में,
उसके मन के आँगन में?
तम के तूणीरों को झेल-झेल कर,
अंधेरों के अंहकारों को पी-पी कर,
जगती के ओर-छोर तक पहुँच जाने को,
लताओं की लोच पर लहकने को,
फूलों के झोंकों पर थिरक जाने को,
काँटों की नोकों पर चढ़ जाने को
दूर क्षितिज पर
कौन आया है,
प्राची के सुंदर प्रांगण में,
उसके मन के आँगन में?
कोमल घास के हरे तेवर को
हिला-डुला कर ताज़ा कर देने को,
झोपड़ियों से महलों तक छा जाने को,
वंचितों को समर्थ बनाने को,
समृद्धि को उच्च संस्कार देने को
दूर क्षितिज पर
कौन जगा है,
प्राची के सुंदर प्रांगण में,
उसके मन के आँगन में?
⁃ सतीश
अक्टूबर 27/29, 2024
धनतेरस
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें