पता जीवन का लिख देना
पता जीवन का लिख देना
भावों की सीधी-टेढ़ी मेड़ों पर,
यहाँ-वहाँ की आपाधापी, भूलों, चूकों पर
सफल-असफल बाती-थाती पर,
तुम नाम जीवन का लिख देना,
पता जीवन का लिख देना!
समय की धूप-धूलि पर,
दिन, रात और गोधूलि पर,
हर हँसी या चोट-कचोट पर
तुम नाम जीवन का लिख देना,
पता जीवन का लिख देना!
कोई चोट जीवन से बड़ी नहीं होती,
कोई सफलता जीवन से सघन नहीं होती,
प्रशंसा या आलोचना सब बीच के पायदान हैं,
जीवन स्वयं जीवन का सबसे बड़ा अवदान है!
हर गति-मति पर, हर प्रगति पर,
हर सोच-शील पर, सार, संसार पर,
अनुभूतियों के हर पड़ाव पर,
हर वन पर, हर उपवन पर,
हर रोक-टोक, रोदन पर,
हर क्रोध-कलुष-क्रंदन पर,
हर प्रेम-नेम-क्षेम पर,
हर वेग पर, हर संवेग पर,
हर वंदन पर, हर चंदन पर,
हर पूजा पर, हर आरती पर,
हर मर्म-कर्म-धर्म पर
तुम नाम जीवन का लिख देना
पता जीवन का लिख देना!
⁃ सतीश/ अप्रैल 11, 12, 2025
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें