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सावन की बातें बरस गईं!

सावन   की   बातें   बरस   गईं !  -  न   जाने   कब   से   पड़ी   हुईं , मन   के   कोने   में   जड़ी   हुईं सावन   की   बातें   बरस   गईं ! भावों   के   कितने   वर्म   खुले , कितने - कितने   मर्म   खिले , आते - जाते ,  सोते - जगते   प्रेम - क्षेम   के   धर्म   जगे ,   सावन   की   बातें   बरस   गईं !  मन   की   भीगी   भीगी   अंग - उमंग आसमान   पर   है   इतराती ,  इठलाती ! फिर   घन   के   तेवर   सघन   हुए , सावन   की   बातें   बरस   गईं !  - सतीश   अगस्त  30, 2023. 

मौसम की बदल

मौसम   की   बदल   मुझे   प्यार   में   आने - जाने   की   आदत   नहीं , तेरी  अलकों   ने   आकर   मौसम   को   बदल   दिया !  मुझे   संकेतों   के   साथ   खेलने   की   आदत   नहीं , तेरी   आँखों   ने   आकर   नया   किस्सा   गढ़   दिया !  मुझे   तो   गीतों   में   बहने   की   आदत   नहीं , तेरे   ओठों   ने   आकर   नव   संगीत   रच   दिया !  मुझे   यों   तो   सजल   होने   की   आदत   नहीं , भीगी   मुस्कानों   ने   आकर   सावन   भर   दिया।   - सतीश   April 22, 2023  & May 6, 2023

नत -उन्नत

नत   और   उन्नत   एक   दूसरे   के   विपर्यय   नहीं !  जब - जब   नत   होकर   अपने   आप   को   देख   सका , नत   होकर   अपने   व्यर्थों   को   समझ   सका , नत   होकर   स्व   के   अर्थों   को   माँज   सका ,  अपनी   हठ   की   गाँठ   को   कुछ   खोल   सका , उज्ज्वल   राहों   के   रोधों   को   हटा   सका , तब - तब   नत   होना   वृथा   नहीं   रहा ,  लगा   कि   मन   की   ग्रीवा   को   सप्राण   शक्ति   मिल   गई , चेतना   को   उन्नत   अर्थ - सत्ता   मिल   गई !  सचमुच ,  नत   और   उन्नत   एक   दूसरे   के   विपर्यय   नहीं !  - सतीश   August 27, 2023. 

भीतर-ही-भीतर

हमारे   भीतर ग़लत   को   गले   लगाने   की   लत   क्यों   रहती   है ? हर   फिसलन   पर   लुढ़क   जाने   की   बेचैनी   क्यों   रहती   है ?  अब - तब ,  यहाँ - वहाँ   ऐसी   भी   विवशता   क्यों   आ   जाती   है ?  “ ऐसा   ही   होता   है ”, “ ऐसा   करना   पड़ता   है ”  इत्यादि   की   भीड़   में   हमारे   महान्   समीकरण ,  ऊँचे   बोध   इतने   असम - विषम ,  ओछे   क्यों   हो   जाते   हैं ?  आदर्श   का   चुनाव   इतना   कठिन   क्यों   हो   जाता     है ?  घोर   दूषण   अचानक   ग्राह्य   कैसे   हो   जाता   है ?  मन   के   भीतरी   स्तरों   में दिन   को   रात   बनने   की   आपाधापी   कैसे   आ   जाती   ह...

बाली

जहाँ   पहुँच   कर   लगता   है   कि   धर्म   को   धर्म   होने   में   कोई   हिचक   नहीं , कोई   संकोच   नहीं ,  चिंता   की   दबोच   नहीं ,  वृथा   व्यथा   नहीं ,  कोई   अनुचित   आग्रह   नहीं ! उपस्थित   है   धर्म   का  “ पूरा   तन ”  सनातन - पुरातन   भाव   से , फैली   हैं   संस्कृति   की   लहरें   क्षीर - भाव   से   उठ - उठ   कर !  विराजमान   रहते   हैं   छोटे - बड़े   मंदिरों   के   द्वार   पर   बड़े - वरिष्ठ ! सचमुच ,  पूजा   के   अन्तस्   तक ,  देवी - देवताओं   के   आशीष   तक पहुँचने   की   राहें   उनसे   होकर   जाती   हैं !  चतुर्दिक विभिन्न   प्रजातियों   के   बड़े - बड़े   पेड़   भी   परस्पर   खींचा - तानी   में  ...

शपथ

शपथ   पथ   की   आत्म - शक्ति   और   गंतव्य   का   चरित्र   होती   है ,  अपेक्षाओं ,  आशाओं ,  आश्वासनों , प्रेरणाओं   की   मान - पीठिका   होती   है !  - सतीश   August 1, 2023. 

क्या कहूँ , क्या लिखूँ ?

जीवन में, अंतत:, एक क्षण ऐसा आता है जब समय की  साँसें सिहर जाती हैं, जीभ हिलने से हिचकती है, विराम पूर्ण हो जाता है!  बड़ी-छोटी उपलब्धियाँ, निराली प्राप्तियाँ, भाग-दौड़, आपाधापी, समीकरण-गणित -  ये सबकुछ अचानक मौन हो जाते हैं!  रह जाते हैं आर-पार कुछ व्यवहार सुलगते हुए, स्मृतियों के सिरहाने बातें टिकी होती हैं,   कुछ भावनाएँ लपक-लपक कर  एक ओर से दूसरे छोर तक कौंध जाती हैं!  कौंधती रहती हैं!  मन के आकाश में सरकते रहते हैं  घने बादल,  गर्जन-तर्जन के साथ, भाव-नर्तन के साथ, छटपटाती, कड़कती बिजलियों के साथ,  भीगते हुए, भीगाते हुए! क्या कहूँ? क्या लिखूँ? -सतीश  August 25, 2023

चाँद तक पहुँच

चाँद   तक   भारत   की   हँसती - खिलखिलाती   पहुँच !  बात   यह   तो   तेरी   या   मेरी   नहीं   है ,  बात   यह   इनकी ,  उनकी   नहीं   है ,  यह   है   बात   भारत   की   पहचान   की   मिट्टी   के   संयुक्त   जागृत   अभिमान   की   उसके   भविष्य   के   सुंदर   अभियान   की आशाओं   से   भरे   बड़े   स्वप्न - यान   की  ! आओ ,  चाँद   की   आँखों   में   रखे   सपनों   को , उसके   मन - तल   में   धरे   क़ीमती   नगीनों   को , हम   साथ - साथ   खोजें ,  साथ - साथ   सँजोयें ! -  चाँद   तक   भारत   की   हँसती - खिलखिलाती   पहुँच !  - सतीश   August 23, 2023.