भगत सिंह जी
भगत सिंह जी तेरे बलिदान की भाषा में देश, जीवन और कला को समर्पण के नव गीत-संगीत, नये संजीवन शृंगार मिले! राष्ट्र-यज्ञ में तेरी ज्वलंत आहुति से भारत माँ को नया अभिसार मिला, उसके चरणों को नई छाप, नई पहचान मिली, उसके मन का उद्वेलन पाप नहीं, पुण्य हो गया; भावनाओं से तप्त होना तब अपराध नहीं रहा, वह युग-युगों के पार जाता पुनीत बोध बन गया; देश के मन-मिज़ाज को तेरे रक्त से आसक्त भंगिमा मिली, स्वतंत्रता के क्षितिज पर राष्ट्र-ह्रदय की धड़कनों को, जीवन के मर्म-कर्म की परत-परत को, नई हूक, नया स्वत्व, नया रागत्व मिला! -सतीश मार्च 23, 2024. (शहीद-दिवस के अवसर पर)